मैं नहीं चाहती कि

तुम मेरे जीवन में

 उजले दिन का

सूरज बनकर आओ..।

 चाहती हूं मैं कि

तुम मेरी अंधेरी

 रातों का चांद

बनकर आओ ..।

जब कोई नहीं

देता है साथ।

तब आकर

थाम लो ,

कसकर

तुम मेरा हाथ 

  और

जला दो आकर

उम्मीदों के

 बुझे हुए

सारे चिराग़ ।

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- प्रतिमा पांडेय