मैं और तुम जैसे दिल और धड़कन
मैं और तुम जैसे बरखा और सावन
मैं और तुम जैसे चांद और चांदनी
मैं और तुम जैसे इश्क़ और इबादत
मैं और तुम जैसे सागर और नदी
मैं और तुम जैसे जल और मछली
कैसे रह सकेंगे हम एक दूजे से दूर
मैं और तुम तो हैं जैसे आत्मा और शरीर
तुम्हारा मेरा जो छूटा साथ कभी
सांस और प्राण अलग हो जाएंगे तभी ।
- PratimaPandey


