बचपन से मेरे साथ रहती है

तब भी थी अब भी मेरे पास रहती है

मेरी खुशी में खुश 

और मेरे दुख में दुखी हो जाती है

मेरी जिंदगी की हमराज है 

मुझे मुझसे ज्यादा जानती है वो

बिना कोई सवाल किये

मेरी सारी बातें चुपचाप सुन लेती है

मैं जो कभी हो जाती हूं उदास

पुराने कुछ किस्से सुना मुझे फिर हंसा देती है वो

हो जाती हूं कभी जो बहुत नाराज़ 

सारा गुबार उसी पर निकाल देती हूं मैं

बस ऐसे मुझे संभाल लेती है वो

जिंदगी के हर सफर पर मेरे साथ होती है वो

मेरे आंसुओं से कभी जाती है भीग

कभी मेरी हंसी की चमक से झिलमिला उठती है वो

जिंदा नहीं है वो

फिर भी मेरी आवाज़ की खनक पहचानती है 

तभी तो मेरे लिखे गीतों को अपने पर उतारती है वो

टूट जाती हूं जो कभी

मेरा हौसला बन जाती है वो

मेरे अच्छे बुरे वक़्त की साथी है वो 

मेरी खास सहेली

मेरी डायरी है वो..।


प्रतिमा पांडेय