हर शाम के बाद सहर है आती,
हर सहर के बाद है आती शाम।
क्यूं धीरज खोता है रे मन,
नहीं रहते सदा मौसम समान।
तेरे जीवन का ये अंधकार भी मिट जाएगा इक रोज ,
नए प्रभात के संग तू करेगा फिर मौज ।
हंसले मुस्कुराले ,कोई गीत नया तू गाले
जीवन जो चला गया , नहीं आने वाला लौट।
Pratima Pandey

