ये काले - काले बादल जल्द ही छट जाएंगे

खुशियों के सारे त्यौहार फिर लौट आएंगे

हम सब गले भी मिलेंगे , हाथ भी मिलाएंगे

हौसला अपना कायम रखना, समय बदलेगा 

फूल वापस से खिलेंगे, पुनः बहारे आएंगी

एक सी नहीं रहती है ऋतु यह जरूर बदलेगी 

माना कि मुश्किल है मगर तब तक टूटना नहीं

दिन फिरेंगे बस तुम उम्मीद का दामन छोड़ना नहीं

- प्रतिमा पांडेय