गिरते है संभलते है,
कभी अपने ही खयालों से बिछड़ते है,
कभी टूट जाते है
तुमसे रूठ जाते है
मगर अंदर दिल मैं तुम्हे उतना ही चाहते है।
इस दुनिया की उलझन मैं,जब सिकुड़ से जाते है
तो हमेशा सुकून के लिए तुम्हारे ही रास्ते आते है।
कभी कभी घुसा आ जाता है
मेरा बरताव तुम्हे रास नही आता है
बस इतना ही कहूंगा
सारे गीले शिकवो को साफ कर देना
मुझे माफ कर देना।


