घमंड हैं रोशनी को उसके उजाले का
उसे क्या पता कितना सुकून दे जाता
हैं ये अंधेरा ...
अपने आप से मिलाता हैं अपने साथ ले जाता हैं कभी अपने लिये, कभी अपनों के लिये सोचने पर मजबूर कर देता हैं 
नयी सुबह जीने का एहसास देता हैं   
पर बहोत कूछ केहकर जाता हैं ये अंधेरा ll


प्रतिक्षा....