तेरी हर बात याद आती हैै माॅँँ
तेरी कमी अब बहुत सताती है मॉं....
एग्जाम, मेरे होते थेे और सो तू नहीं पाती थी,
सुबह जल्दी जाना मुझे होता था और पहले जाग तू जाया करती थी
इतनी बड़़ी़ हो गई पर चोटी बनाना भी नहीं सीख पाई माॅँँ
क्योंकि स्कूल से कॉलेज तक हर दिन मेरी चोटी तू ही तो किया करती थी मॉं.....
सुबह सात बजे नाश्ता हाथ में दूध का ग्लास देती थी,
और शायद इसीलिए मेरी आदतों से परेशान भी रहती थी,
पर ये आदत भी तो तूने ही डाली थी न मॉं.....
बेशक रुठती भी थी तू मुझसे-2
और मैं मनाती भी नहीं थी ,
पर फिर भी दो पल में मेरी पसंद का कुछ बनाकर, खुद भी हमारी लड़़ा़ई भुला भी दिया करती थी माॅँँ....
तेरी हर बात याद आती है मॉं,
तेरी कमी अब बहुत सताती है मॉं.....
गलती मैं करती थी तो थोड़़ा़ डांटकर समझाया भी तू ही करती थी मॉं,
मेरी हर खुशी में मुझसे ज्यादा खुश तू हुआ करती थी मॉं,
खुद की न साेेेेेचकर हमारी हर इक्षा को पूरा तू किया करती थी मॉं...
कुछ पापा से छुपा के तो कुछ इधर-उधर से बचाके पैसे हमारे लिये तू बचाया करती थी मॉं...
तेरी हर बात याद आती है मॉं,
तेरी कमी अब बहुत सताती है मॉं.......।

