दिल की धड़कनें तेज हो रही हैं,
शायद वो मेरे पास आ रही है।
पहली नज़र में जो सादगी थी,
उसी सादगी से नज़रें मिला रही है।
बहुत सालों बाद देख़ रहा हूँ उसे,
खुली ज़ुल्फों में बड़ी प्यारी लग रही है।
शायद क़ुछ कहना चाहती है मुझसे,
वो मेरी तरफ़ आ रही है जा रही है।
जा, उठ तू ही बात शुरू कर पहले,
वो तुझे देख रही है, शर्मा भी रही है।
आज थोड़ी सी हिम्मत तू भी दिखा,
कब से वो इशारे देती जा रही है।
आज मौक़ा है उसे गवाँ मत 'आतिश',
तेरे इज़हार की उम्मीद में वो रुकी रही है।
~आतिश


