पल भर जब पीपल के कुछ पीले पात के ऊपर गिरी

दिनकर की रश्मी किरणो से 

मेरे हलके सुनहरी केश कुछ

कह गए...

तो लगा कि नूतन नवल नयन मेरे

बह गए...

कि कोई आने को है

रुक रुक कर थम थम कर उर ऊर्मि

जिस की राह देखे है...

वो अनजान , पता ही नही कि,

जग नव उल्लास में मगन

मेरा तो उनके आने मे है,


प्रतिभा पाल