मिट्टी के तन में जब हों,लोहे के जज्बात
कोमल स्पर्श छुअन करने वाली उंगलियाँ
बनाएं जब कठोर दबाव,चाहे हो कम्पूटर या फोन की कुंजियाँ|
दिल की तारें झनकारे,लेकिन आभासी दुनिया के नकली चेहरे जब पुकारें,
तो मन मानव भी थक कर हारे|
क्योंकि मिट्टी का रहेगा तो मिट्टी में मिलेगा,
लोहा बनकर न गलेगा,न जलेगा|
बार बार यहीं रहेगा...यहीं रहेगा|
प्रतिभा पाल


