रुक रूककर,रह रहकर तेरा याद आना
जालिम है इश्क,तेरा रग रग में समा जाना|
आँखों से गिरते तेरी याद में,इन मोतियों का बिखरना
आईना भी कह रहा क्यों भूल गयी अब संवरना|
साँसों की उफनती लहरों को किनारे का ना मिलना
काम ही अब है तेरे इंतज़ार की घड़ियाँ गिनना|
खुदा तू मेरा , तेरा इश्क, मेरी इबादत
चाहे जो भी हो अंजाम,बन गया तू मेरी रूह की आयत|
प्रतिभा पाल
