धड़कने लगा तू न जाने कब से,

खबर हुई न मुझे कसम से|


तुझे क्या पता तू क्या कर गया,

धीरे धीरे,ख्वाबों ख्यालों में बसर कर गया|


धड़कने लगा तू न जाने कब से,

खबर हुई न मुझे कसम से|


तू अनजान है या नादान है,

मेरे हाल से क्यों परेशान है?


धड़कने लगा तू न जाने कब से,

खबर हुई न मुझे कसम से|


प्रतिभा पाल