जैसे किवाड़ से चिटकनी ने कुछ कहा,
नजदीक आ भर लूं बाहों में कहीं और न जा|
जैसे खिड़की ने रोशनी से कहा ,
गर्म सांसें मेरी कर दे,मुझमें जा समां|
जैसे दीवार ने छत से कहा,
मेरे काँधे तू अपना रख सर,मेरा हो जा|
जैसे बुनियाद ने इमारत से कहा,
मेरा तो तू है सदियों से,तुझे है पता,मुझे है पता|
प्रतिभा पाल


