मैं तो उनमें इतनी डूबी रही....

कि बेसुध दिल कहता रहा ,आप बहुत अच्छे हैं|


वो इस कदर धडकनों में समां गए ,निंदिया चुराई जिसने

कि बेसुध दिल कहता रहा,आप बहुत अच्छे हैं|


अपने आप पर इतराने लगी,बनने संवरने और आईने को कहने लगी,

कि बेसुध दिल कहता रहा आप बहुत अच्छे हैं|


उनकी बातें गुदगुदाने लगी.दुनिया से अब मैं बुझी बुझी रहने चली,

कि बेसुध दिल कहता रहा आप बहुत अच्छे हैं|


जरा सा अधरों की मुस्कराहट बढने लगी,न जाने किसकी नज़र लगी

अब भी दिल कहता रहा,आप बहुत अच्छे है|


न जाने क्या मुझसे खता हुई,कि वो अब मुझसे खफ़ा खफ़ा रहने लगे,

दिल तो बेसुध है ...कहता रहा आप बहुत अच्छे है|


अचानक बातों का सिलसिला एक तरफ़ा जारी रहा, न जाने किस पते पर मेरे ख़त जाते रहे

उन्हें पढ़ वो मुस्कुराते हैं या फिर और मुझे बुरा भला कह जाते हैं ....

क्या करूं दिल तो उनका हुआ ,बेसुध है कहता ही रहा आप बहुत अच्छे हैं|


प्रतिभा पाल