तुम्हे शायद मालूम नहींतुम्हे शायद मालूम नहींअक्सर उस खिड़की की तरफ नज़र जाती हैंपर ये क्या नज़र उठने से पहले ही झुक जाती है ।।
तुम्हे शायद मालूम नहींतुम्हे शायद मालूम नहीं
अक्सर उस खिड़की की तरफ नज़र जाती हैंपर ये क्या नज़र उठने से पहले ही झुक जाती है ।।