चलो पिछला सब ख़त्म करते हैं
गिले शिकवे सारे भूल जाते हैं
एक दूसरे से अजनबी बन
एक नई शुरुआत करते हैं
“हैलो ! नाम क्या है तुम्हारा”
“कहो कैसे हो तुम”
ऐसे कुछ औपचारिक संवादों से आग़ाज़ करते है
सुनो
इस बार दुनिया के रस्मों रिवाजों से नही
बाँधेगे एक दूजे को मुहब्बत के पक्के धागों से

