उतरता ही नही है सीने से
अब ये गम शराब पीने से
ऑंखों में ताबनाक कम है
जिंदगी हुई बेज़ार जीने से
ताबनाक:- उज्जवल, bright
वक्त आ रहा है मेरी तरफ
दर्द ने आवाज दी है धीमे से
दिल में जलन है और टीस भी
जिस्म पर घाव हैं नगीने से
वो मुझे इस तरह मिली, जैसे
ऊन के रिश्ते हैं सर्दियों से


