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श्रंगार


बोने हैं जो मधुबन के फूलों में बिरह लायेमैंने देखा कैसे भंवरे छुप - छुप कर बिलखाये

क्या समझाऊँ रूठी - मुरझी बेलों कोहर हुए इन घावों का सार

है! सजगता ही श्रंगारहै! सजगता ही श्रंगार

— प्रतीक कौशिक
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