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सफर


|सफर|

जख़्म की भर गयादवा सुला के गई,निगाहों में थी मंजिलहवा उड़ा ले गई ....

काफिले गूंगे खडे़ रहेसदा सुना के गई,सब ने जोडी दो दो आँखेसत्ता चुरा ले गई....

— प्रतीक कौशिक
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