मो संग कब तो होरी खेलोगे सांवरिया गिरधारी
कब तक तेरी बाट निहारूँ मैं विरह की मारी
अनहद की झनकार बजाओ, प्रेम रंग पिचकारी
उड़त गुलाल लाल भये बदरा, हरषि उठे बृजवासी
सकल कामना कौशिक की है मोहनलाल, मुरारी
-प्रतीक कौशिक


मो संग कब तो होरी खेलोगे सांवरिया गिरधारी
कब तक तेरी बाट निहारूँ मैं विरह की मारी
अनहद की झनकार बजाओ, प्रेम रंग पिचकारी
उड़त गुलाल लाल भये बदरा, हरषि उठे बृजवासी
सकल कामना कौशिक की है मोहनलाल, मुरारी
-प्रतीक कौशिक