मर  कर  भी   धडकता  है दिल

किसकी  याद  में तड़पता है दिल 


गलें  में  खराशें   लिये  उगता  है 

कितनी  झूँठ  से गुजरता  है दिल 


आया था  लेकर रफ़ाक़त का हाथ

ऐसी  तारीख़ो से बहलता  है दिल 


मुस्तक़िल है इक ग़ुल में वो शाइर

ख़्वाबे - वस्ल ले  टहलता  है दिल 


तंज़ सुनता है हर एक नफ़स  पर

और हिर्से-शोहरत में चमकता है दिल


- प्रतीक कौशिक