गाँव से शहर लौटने पर
घर से निकलते वक़्त
हर बार पापा के होठों पर होती है एक गहरी चुप्पी
जो मुझे अहसास कराती है कि
हम दोनों में से कोई एक इस यात्रा में अवश्य छला जायेगा|
-प्रतीक कौशिक


गाँव से शहर लौटने पर
घर से निकलते वक़्त
हर बार पापा के होठों पर होती है एक गहरी चुप्पी
जो मुझे अहसास कराती है कि
हम दोनों में से कोई एक इस यात्रा में अवश्य छला जायेगा|
-प्रतीक कौशिक