हर तरफ से उठती अंगुलियाँ

खुदा की खुदा पर उठ़ती अंगुलियाँ


झूठ की सत्य पर

सत्य की अदालत पर उठ़ती अंगुलियाँ


औरत की आदमी पर

आदमी की आदमियत पर उठ़ती अंगुलियाँ


समाज की परिवारों पर

परिवार की स्वजनों पर उठ़ती अंगुलियाँ


संस्कृति की संस्कारों पर

सरकारों की आदतों पर उठ़ती अंगुलियाँ


बड़ो की छोटो पर

घरों की जड़ो पर उठ़ती अंगुलियाँ


कम्युनिस्ट की लोकतंत्र पर

लोकतंत्र की वादों पर उठ़ती अंगुलियाँ


एक पार्टी की दूसरी पर

दूसरी की तीसरी पर उठ़ती अंगुलियाँ


कलियुग की राम पर

राम की पहचान पर उठ़ती अंगुलियाँ


भूत की वर्तमान पर

वर्तमान की भविष्य पर उठ़ती अंगुलियाँ


हमारी हम पर

हम पर सबकी उठ़ती अंगुलियाँ


कश्मीरी पंडितों की बारूद पर

बारूद की सांसो पर उठ़ती अंगुलियाँ


पत्रकार की नेता पर

नेता की विजेता पर उठ़ती अंगुलियाँ


चीन की भारत पर

भारत की माता पर उठ़ती अंगुलियाँ


प्रिंट मीडिया की डिजिटल मीडिया पर

डिजिटल मीडिया की खब़रों पर उठ़ती अंगुलियाँ


भावनाओं की भाषाओं पर

भाषाओं की मौन पर उठ़ती अंगुलियाँ


गरीब की पेट पर

पेट की रोटी पर उठ़ती अंगुलियाँ


समस्या की कविताओं पर

कविताओं की कवियों पर उठ़ती अंगुलियाँ


दर्द की इश्क़ पर

इश्क़ की वजह पर उठ़ती अंगुलियाँ


आंखों की स्वपनों पर

स्वपनों की नींद पर उठ़ती अंगुलियाँ


मंजिल की पैरों पर

पैरों की रास्तों पर उठ़ती अंगुलियाँ


इम्तिहान के परिणाम पर

परिणाम की अभ्यर्थियों पर उठ़ती अंगुलियाँ


खुदा के होने पर

खुदा के ना होने पर उठ़ती अंगुलियाँ


हर तरफ से उठती अंगुलियाँ

खुदा की खुदा पर उठ़ती अंगुलियाँ....


-प्रतीक कौशिक