गर्द साजो पर
सर्द रातो पर
पुरानी यादें ,
तेरी आँखों में पानी ,
तू अँधेरे की रानी ।।
मौन हैं ,गौण हैं
तेरी टूटी पलकें
अंजन की मोहिनी पुरानी
तू अँधेरे की रानी ।।
खुदको लुटाकर मिली
खुशियाँ नदारद हुई
तेरी जिद की बस यही कहानी
तू अँधेरे की रानी ।।
आभाओं को दिल में ,
समेट अदाओं की कतरने ,
दरिया है तू
अब माटी किनारे है लगानी
तू अँधेरे की रानी ।।
- प्रतीक कौशिक


