अंधेरे की रानी संग्रह से एक नज़्म


कभी आधे चांद पर नाज़ हुआ है तुम्हे

कभी उसे भी देखा है पूरी छलनी से


मुझे भी तो बता राज ये मेरे नज़र आने का


- प्रतीक कौशिक