तुम दवा बन जाओ इश्क़ की,मैं बीमार बैठा हूँ,तुम्हारी इन तिखी नज़रों का शिकार बैठा हूँ ।इश्क़ में बस हा की देरी है ग़ालिब,मैं तो कब से तुम्हारे गली के बाहर तैयार बैठा हूँ ।।