ख्वाब हैं तो उनका ख्याल रखा करो

घर लौटते वक्त कुछ सवाल रखा करो

मेरा इक पल गुजरता नहीं तेरे वगैरह

तबीब कहता है खुद को बेख्याल रखा करो

मोहब्बत के वास्ते नही भरम के वास्ते

तुम किताबों मे गुलाब रखा करो

जो गम को थोड़ा कम कर सके

ऐसे ऐब दो चार यार रखा करो