बादशाह जब वतनपरस्ती सिखायेंगे


समझ लेना कांसे भी बिक जायेंगे


मुझसा वेवफा जमाने मे नहीं दिखेगा


उस से आशिक हर गली मे मिल जायेंगे


वो कहता हैं जमीं पर पांव तब रखेगा


जब सब मंदिरों मस्जिद गिर जायेंगे


भक्तों ने राह तो सजाईं शबरी सी मगर


राम ये कहकर चले गये कि फिर आयेंगे

सब नये शहर की तामीर से खुश थे


मैं बहुत रोया कि कई गांव मिट जायेंगे