|अँधेरे की रानी| [भाग-१८]


जुगनू अपनी उड़ान से कैसे वाज आऐगा

दिल ये है थोड़ा चटका कैसे रास आऐगा


सब ने ही मसली हैं यहाँ गुलाब की पत्तियाँ

ये मुंसिफ़ उस हथेली को कैसे जान पाऐगा


मेरे साथ जो रहेगा वो बर्बाद हो जाऐगा

पर दूर होकर वो मुझसे ये कैसे मान पाऐगा


झीनी होती है बहुत ही इश्क़ की चादर

दिल के दरिया को "कौशिक" कैसे थाम पाऐगा


-प्रतीक कौशिक