वजह तलाश कर रहा था खुद के हार जाने की

थोड़ी तफ्तीश से मालूम हुआ कि

.......वजह तुम हो।।

दिन और रात का सबब गुम सा हो गया 

मैं खुद कुछ भी ना रहा सब तुम सा हो गया

अभी भी पूछते हो की कैसी बेकरारी है

मैं बस इतना कहूंगा की वजह तुम हो।।

तेरे आसपास होता हूं तो सिर्फ तुझको देखता हूं

किताबो पर नजरे रुकती ही कहां है

जो आखें बंद कर सोचना मैं चाहूं

ख्वाबों में बस मैं तुमको ही पाऊं

तुम्हे अगर पता हो तो मुझको बताना

क्या है वो किस्सा मुझे भी सुनाना

कैसे मैं बदलू आदतन ये अपनी

अगर राज है कोई तो मत तुम छुपाना

मगर अभी मत पूछो की क्यों मैं भटकता

क्या राज दिल में क्यों मैं तड़पता..

मैं बस इतना कहूंगा की

......वजह तुम हो।।