इतना शोर करो कि

आवाज तुम्हारी हर कूचे में हो

हर दफ्तर के कोने मैं भी

हर मकान में तो हो ही 

सबके जहन में भी हो..

इतना शोर करो..

शोर की सीरत ऐसी हो की हर ज़र्रे को ये मालुम हो जाए 

की एक काफिला निकला है अपने हक को पाने के लिए

एक काफिला निकला है तुम्हे ये बताने के लिए 

की तुम्हारी जंजीरों को अब टूटना होगा 

हर नियम को पैमाने से गुजरना होगा

तुम्हारे बेफिजूल की बंदिशों को हटना होगा

हर मुकाम मैं ये गूंज हों जाए 

इतना शोर करो ।।