उलझनें बहुत हैं ज़िन्दगी में,

सुलझाने के लिए वक्त चाहिए

वक्त बेवक्त चोट पहुंचती रहती है घावों पर,

उन्हें भूल जाने के लिए वक्त चाहिए

गम की स्याही में भीगे हैं अनगिनत पन्ने,

उन्हें सुखाने के लिए वक्त चाहिए

तेरे लिए ना जाने कितने लिखें हैं शब्द मैनें,

उनका मतलब जताने का भी वक्त चाहिए।


तू है कहीं भी, खुश तो है

पर हिचकियां आती ही होंगी

मेरे शब्दों को, तेरी धड़कनें

हर पल यूहीं गुनगुनाती होंगी

मेरे दिल से निकलने की इतनी जल्दी कोशिश ना कर

प्यार को दिल से भुलाने को, थोड़ा तो वक्त चाहिए

उलझनें बहुत हैं ज़िन्दगी में,

सुलझाने के लिए वक्त चाहिए।


शामें जो गुज़री तेरे संग,

उन रास्तों पर चल रहा हूं

कदमों से कदम मिलाने को,

तेरे ही कदमों को पढ़ रहा हूं

वो गलियां, वो सर्दी, वो बारिश की बूंदें

सब यहीं हैं, तू नहीं

इन आदतों को बदलने का,

थोड़ा तो इनको वक्त चाहिए

तेरे लिए ना जाने कितने लिखें हैं शब्द मैनें,

उनका मतलब जताने को थोड़ा तो वक्त चाहिए,

उलझनें बहुत हैं ज़िन्दगी में,

सुलझाने के लिए थोड़ा तो वक्त चाहिए।