इस समय का कोई तोड़ नहीं,
वो कभी कहां रुक पाएगा
जो कल तक था वो आज नहीं,
कल नया सवेरा आएगा ।
जीवन के इस कठिन पथ पर,
वो मोड़ कहीं थम जाएगा
जो बीत गया सो बीत गया,
ये समय नही रुक पायेगा ।
दिखता है उड़ता पंछी,
जब तिनके लेकर आता है
एक एक तिनके से ही वो,
अपना संसार बसाता है।
कोशिश तुम करते रहना,
हो मंज़िल चाहे दूर कहीं
ना रुकना तुम ना झुकना तुम,
हो हिम्मत सारी चूर कहीं।
मंज़िल ना मिल पाई तो,
अद्भुत सामर्थ्य आएगा
रुक के पीछे अब क्यूं रहना
ये समय नहीं रुक पायेगा ।
आज का ये जो संकट है,
नहीं रहेगा सदा यहीं
हिम्मत करके बस डटे रहो,
बुझने ना दो अब आस कहीं।
समय चक्र पहचानो तुम,
हर रात बड़ी अंधियारी है,
सूरज सा दीप जला लो तुम,
एक लौ बहुत उजियारी है।
रस्ता भी आधा अब निकल गया,
अब पीछे मुड़ क्या पायेगा
तू रुक भी गया तो फर्क नहीं,
ये समय नहीं रुक पायेगा ।


