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दो शे'र


किसी के आंखों की बे-क़रारी हमारी आंखों में आ गई थी,किसी के होंठों की ताज़गी ने हमारे होंठों का हाल देखा।

जो ख़्वाब थे वो बिखर चुके थे जो रंग था वो उतर चुका था,मगर ख़यालों में एक सूरत थी जिस में हमने ग़ज़ाल देखा।

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