हाथो पर लोबांन जला कर बैठा हुँ मै
जलता सूरज पिघला कर बैठा हुँ मै
हाल सबका पुछते हो कभी मेरा भी पूछ
कितनो से तेरी खातिर हार कर बैठा हुँ मै
हसकर सबसे मिलता झुलता हुँ मै मगर
क्या खबर है कितनो से रूठा बैठा हुँ मै
लोग कतरे कतरे का सौदा करते फिरते है
भटका बैरागी कब्र मे सिमटा बैठा हुँ मै
समन्दर बाबस्तां है मुझे डूबाना चाहता है
घमंडी लहरो से दो-दो हाथ जो कर बैठा हुँ मै


