हर रोज हर समये मै थका थका सा रहता हूं, लम्हा लम्हा हर वक्त मै बेमौत मरा करता हूं । ये जिन्दगी जिन्दा रहने को मना किया करती है, मगर मै क्या करूं ऐसॉ से दबा रहता हूं। जीने के लिए लाखो जतन हो सकते है, मगर क्या करूं हर वक्त कफन से बधां रहता हूं। किसकी करूं इबादत किसको सराऊ मै, मगर मै क्या करूं पत्थर सा बना रहता हूं। हर रोज हर समये मै थका थका सा रहता हूं, लम्हा लम्हा हर वक्त मै बेमौत मरा करता हूं ।