बिस्तर पर  करवटें बदलता रहा रात भर

तेरी याद मे शायर तड़पता रहा रात भर


धड़कने शबिस्ता थी  सांसे डगमगाती रही

मेरी आंखो से जो तु बहता  रहा रात भर


तन्हाईयो ने दर्द से जो सौदा अब कर लिया

शायर तेरी बेदर्दी मे सिसकता रहा रात भर


हम दोनो जो इक जिस्म दो जान जैसे थें

फिर मै ही क्यों दर्द मे पिघलता रहा रात भर


मोहब्बत का ख्वाब जो सिर्फ मैने ही देखा था

शायद उसी सजा मे मै बिलखता रहा रात भर


इस गहरे अंधेरे मे तेरा चेहरा जो नजर आया

ख़स्ताहाली मे शायर चींखता रहा रात भर