वो शाम गर गुजरी न होती तो हम तन्हा हुए न होते, वो शुबह गर हुई न| होती तो हम मगरूर हुए न होते। सजा मिली जुदाई कि खता हमसे क्या एैसी हुई, मोहब्ब तो बेहिसाब थी उनसे बेवजह की रूश्वाई क्यो हुई । उनका बिछ़ड़ना गर न होता तो हम अकेले हुए न होते, वो लम्हा गर गुजरा न होता तो हम बेगाने हुए न होते। वो शाम गर गुजरी न होती तो हम तन्हा हुए न होते, वो शुबह गर हुई न होती तो हम मगरूर हुए न होते। सजा मिली जुदाई| कि खता हमसे क्या एैसी हुई, मोहब्ब तो बेहिसाब थी उनसे बेवजह की रूश्वाई क्यो हुई । उनका बिछ़ड़ना गर न होता तो हम अकेले हुए न होते, वो लम्हा गर गुजरा न होता तो हम बेगाने हुए न होते।