वो शाम गर गुजरी न होती
तो हम तन्हा हुए न होते,
वो शुबह गर हुई न|
होती तो हम मगरूर हुए न होते।
सजा मिली जुदाई
कि खता हमसे क्या एैसी हुई,
मोहब्ब तो बेहिसाब थी
उनसे बेवजह की रूश्वाई क्यो हुई ।
उनका बिछ़ड़ना गर न होता तो
हम अकेले हुए न होते,
वो लम्हा गर गुजरा न होता
तो हम बेगाने हुए न होते।
वो शाम गर गुजरी न होती
तो हम तन्हा हुए न होते,
वो शुबह गर हुई न होती
तो हम मगरूर हुए न होते।
सजा मिली जुदाई|
कि खता हमसे क्या एैसी हुई,
मोहब्ब तो बेहिसाब थी
उनसे बेवजह की रूश्वाई क्यो हुई ।
उनका बिछ़ड़ना गर न होता तो
हम अकेले हुए न होते,
वो लम्हा गर गुजरा न होता
तो हम बेगाने हुए न होते।