Poetry 1 min read 797.5K reads

Jindgi


क्यू उदाश है जिंदगीबड़ी बकबाश है जिंदगी।

कुछ दिन ही है जीना,फिर भी क्यू ख़ास है जिंदगी।। :प्रशान्त गौतम"उत्कर्ष"

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