जब रात की आंखों का काजल
कतरा कतरा बह जाता है
जब गहरा रंग उदासी का
अश्कों में ही घुल जाता है ।
एक टीस सी दिल मे चुभती है
तन्हाई शोर मचाती है
उस वक्त मेरे पागल दिल को
बस याद तुम्हारी आती है ।।
जब सावन में काले बादल
झम झम बारिश करते हैं
जब मोर थिरकते है वन में
कुछ सोख पपीहे गाते हैं ।
जब मस्त पवन की लहरें भी
बदन को यूं चुभ जाती है
उस वक्त मेरे पागल दिल को
बस याद तुम्हारी आती है ।।

