दिल तन्हा सा खाली क्यों है
खुद से ही तू सवाली क्यों है
सारे सपने कहीं खो गए
सब अपने भी रह गए
अब खुद की पहचान नहीं है
होंठो पर मुस्कान नही है
चारों तरफ बदहाली क्यों है
दिल तन्हा सा खाली क्यों है।।
आँखों से नींदे रुसवा हैं
धड़कन भी दिल मे तन्हा है
अब वह मीत कहाँ से लाऊँ
हाल-ए-दिल किसको बतलाऊ
अब कोई अरमान नही है
कुछ भी तो आसान नही है
दुआ भी लगती गाली क्यों है
दिल तन्हा सा खाली क्यों है।।


