सबकी मौत का एक दिन मुक़र्रर है

मौत सबको ही आनी है,

आएगी ही

आज उनकी, जो बोल रहे हैं

कल उनकी, जो चुप खड़े तमाशा देख रहे हैं।


और जब मरने वाला कोई नहीं बचेगा,

तो वो तमाशबीनो भी मारेंगे

मारेंगे ही

क्यूँकि उनके मुँह ख़ून लग चुका है।


-प्रशांत सिंह

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