क्या बात कहूं तेरे सजदे

मैं काया तू परछाई है I

गर सूरज की मैं चकाचौंध 

तू बादल की अंगड़ाई है I


तू संकरी गली बनारस की

शिव के द्वारे पहुँचाती है I

मैं मन्त्रमुग्ध हो सुनूँ तुझे 

तू गंगा घाट की आरती है I

दामन में तेरे रहे स्नेह

मेरे जीवन का मूल मंत्र I 

तू चपल मेह घनघोर घटा

मैं तानसेन का वाद्य यंत्र I

तेरा वसुधा पर होना ही

हर मन्नत की सुनवाई है I

गर सूरज की मैं चकाचौंध 

तू बादल की अंगड़ाई है I


जल तरंग की नदिया में

गंगा सा विचरण करती तू I

साहिल सा तकता रहता मैं

धारा प्रवाह हो बहती तू I

बगिया के फूल बहारों सी

बन इत्र हवा में घुलती तू I 

भंवरे सा फिरता रहता मैं 

बन कली बाग में खिलती तू I

सुर्ख फिज़ा की हसीं शाम 

तू सावन की पुरवाई है I

गर सूरज की मैं चकाचौंध 

तू बादल की अंगड़ाई है I