ख्वाब नही वो हक़ीक़त है
जो भी है क़यामत है
दिखती है जिसमें एक हँसती ज़िन्दगी
वो लड़की बहुत खुबशुरत है
सो जाता हूँ जिसे मैं रोज पढ़ते पढ़ते
वो खुदा की लिखी एक इनायत है
उसके शहर से मेल खाता है मिज़ाज उसका
उसकी कुछ ऐसी शख्सियत है
नखरे नवाबी बात शराबी
मुझे उसकी कुछ शिकायत है
रंग ए मिजाज कुछ गुलाब सा है
जब गुस्से में वो लबालब है
खैर छोड़ो ये जो है सब उसका है
मुझे तो बस उस से मोहब्बत है


