अल्फ़ाज़ कम पड़े तो ख़ामोशी समझाना सीख लो
दर्द सह ना पाओ तो अपनो में बांटना सीख लो
ये दुनिया हैं रंग बिरंगे लोगों का मेला
इस मेले में खो जाओ तो घर जाना सीख लो
सीख लो कि अभी वक़्त है अपने मरहम लगा देंगे
जो ना सीखे दुनिया छोड़ के जाना सीख लो
पर चुप मत रहो
बोलो खुल के बोलो बेझिझक बोलो

