जब हर पेड़ धरा से कट जाएगा
तब हर शख्स बड़ा पछताएगा
जब सारे पत्ते गिर जाएंगे
जब आखिरी पतझड़ आएगा
जब दुःख के बादल घिर आएंगे
तब मानवता की जड़ हिल जाएगी
तब हर शख्स बड़ा पछताएगा
जब धरती खुद को पी जाएगी
जब कुल्हाड़ी खुद को काटेगी
तब साँस भी साँस को तरसेगी
फिर कहीं से उड़ एक आख़िरी चिड़िया
एक सूखे शाख पर आ बैठेगी
उस सुखी टहनी से लिपटेगी
आखिरी कुछ पल वो विश्राम करेगी
मृत्यु का वो गान करेगी
डाल डाल पर फुदक फुदक कर
पेड़ों की वो व्यथा कहेगी
पंखों को अपने वो नोच नोच कर
मानवता पर आघात करेगी
वो आखिरी चिड़िया खामोश हो कर
देखेगी अन्तिम वृक्ष का अन्त
अकेली हाँ वही अकेली चिड़िया
देखेगी सबका आखिरी बसन्त......


