ये रातेंये तनहाई भरी रातेंसुनेपन को छिपातीये ख़ामोशी भरी रातेंदर्द-ए-दिल को जगातीये उदासी भरी रातें ।प्रणव यादव
ये रातेंये तनहाई भरी रातेंसुनेपन को छिपातीये ख़ामोशी भरी रातेंदर्द-ए-दिल को जगातीये उदासी भरी रातें ।
प्रणव यादव