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ये रातें


ये रातेंये तनहाई भरी रातेंसुनेपन को छिपातीये ख़ामोशी भरी रातेंदर्द-ए-दिल को जगातीये उदासी भरी रातें ।

प्रणव यादव

— Twitter - @pranavindian1
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