1 min read 794.6K reads

मंज़िल


बिखरा है चारो तरफ़ धुआँ-धुआँसमेट इन्हें तुम आसमां बना दो ।फैला है दूर-दुर तक घना अँधेराआ हमसफ़र कोई चराग़ जला दो ।भटकता रहा हूँ मैं यहाँ राह-राहसीनें से लगा लो मंज़िल बना दो ।

~ @drpranavindian#PoetryNight

Read more Earn more Learn more