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आज़ाद रहो

मुहब्बत की जुदाई को

बस इतना समझ

शीशे में देख खुद को

पंछी जो समझता है

बस उतना समझ ।


अब उड़ जा तू

खुले गगन में

हसरत ना रखन

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