मुहब्बत की जुदाई को

बस इतना समझ

शीशे में देख खुद को

पंछी जो समझता है

बस उतना समझ ।


अब उड़ जा तू

खुले गगन में

हसरत ना रखना

फिर से जाने के

तू दर्पण में ।


समझ ले कि तू

आज़ाद था आज़ाद है

और आज़ाद रहेगा ।


- प्रणव यादव

@pranavindian1